श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.38.9 
न विश्वसेदविश्वस्ते विश्वस्ते नातिविश्वसेत्।
विश्वासाद् भयमुत्पन्नं मूलान्यपि निकृन्तति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो विश्वासयोग्य न हो, उस पर विश्वास मत करो; परन्तु जो विश्वासयोग्य हो, उस पर भी अति विश्वास मत करो। विश्वास से उत्पन्न भय, विश्वास की जड़ ही नष्ट कर देता है।॥9॥
 
Do not trust someone who is not trustworthy; but do not trust too much even someone who is trustworthy. The fear that arises from trust destroys the very root of it.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)