Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.38.3: महापुरुषों ने कहा है कि जो वेदों में पारंगत ब्राह्मण दाता के लोभ, भय या कृपणता के कारण उसके घर का जल, मधु या गाय ग्रहण नहीं करता, उसका जीवन व्यर्थ है। | mahabharat अध्याय 5.38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्योदकं मधुपर्कं च गां च
न मन्त्रवित् प्रतिगृह्णाति गेहे।
लोभाद् भयादथ कार्पण्यतो वा
तस्यानर्थं जीवितमाहुरार्या:॥ ३॥
अनुवाद
महापुरुषों ने कहा है कि जो वेदों में पारंगत ब्राह्मण दाता के लोभ, भय या कृपणता के कारण उसके घर का जल, मधु या गाय ग्रहण नहीं करता, उसका जीवन व्यर्थ है।
The great men have said that the life of a Brahmin well versed in the Vedas does not accept water, honey or a cow from his house due to the greed, fear or miserliness of the donor, is worthless. 3.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥