vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश
»
श्लोक 22
श्लोक
5.38.22
अप्रशस्तानि कार्याणि यो मोहादनुतिष्ठति।
स तेषां विपरिभ्रंशाद् भ्रंश्यते जीवितादपि॥ २२॥
अनुवाद
जो मनुष्य मोहवश होकर बुरे कर्म (शास्त्रविरुद्ध) करता है, वह उन कर्मों के दुष्परिणामों के कारण अपने प्राण खो देता है ॥22॥
One who, out of delusion, performs evil deeds (prohibited by scriptures), loses his life due to the adverse consequences of those deeds. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×