Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.38.19-21: राजा को चाहिए कि वह बिना परीक्षा किए किसी को भी अपना मंत्री न बनाए; क्योंकि धन प्राप्ति और मंत्र की रक्षा का दायित्व मंत्री पर ही रहता है। जिस राजा के धार्मिक, आर्थिक और यौन संबंधी कार्य, उनके पूर्ण हो जाने पर ही सभासदों को ज्ञात होते हैं, वह सब राजाओं में श्रेष्ठ है। जो राजा अपने मंत्र को गुप्त रखता है, वह निस्संदेह सिद्धि प्राप्त करता है॥19-21॥ | mahabharat अध्याय 5.38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नापरीक्ष्य महीपाल: कुर्यात् सचिवमात्मन:॥ १९॥
अमात्ये ह्यर्थलिप्सा च मन्त्ररक्षणमेव च।
कृतानि सर्वकार्याणि यस्य पारिषदा विदु:॥ २०॥
धर्मे चार्थे च कामे च स राजा राजसत्तम:।
गूढमन्त्रस्य नृपतेस्तस्य सिद्धिरसंशयम्॥ २१॥
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह बिना परीक्षा किए किसी को भी अपना मंत्री न बनाए; क्योंकि धन प्राप्ति और मंत्र की रक्षा का दायित्व मंत्री पर ही रहता है। जिस राजा के धार्मिक, आर्थिक और यौन संबंधी कार्य, उनके पूर्ण हो जाने पर ही सभासदों को ज्ञात होते हैं, वह सब राजाओं में श्रेष्ठ है। जो राजा अपने मंत्र को गुप्त रखता है, वह निस्संदेह सिद्धि प्राप्त करता है॥19-21॥
The king should not appoint anyone as his minister without testing him properly; because the responsibility of acquiring wealth and protecting the mantra rests on the minister. The king whose religious, economic and sexual works are known to the members of the court only after they are completed, is the best among all kings. That king who keeps his mantra secret, undoubtedly attains success.॥19-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥