Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.38.15-16h: जिसकी सलाह भीतरी या बाहरी किसी को भी पता नहीं चलती और जो सब ओर दृष्टि रखता है, वह राजा दीर्घकाल तक समृद्धि भोगता है ॥ 15 1/2 ॥ | mahabharat अध्याय 5.38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्य मन्त्रं न जानन्ति बाह्याश्चाभ्यन्तराश्च ये॥ १५॥
स राजा सर्वतश्चक्षुश्चिरमैश्वर्यमश्नुते।
अनुवाद
जिसकी सलाह भीतरी या बाहरी किसी को भी पता नहीं चलती और जो सब ओर दृष्टि रखता है, वह राजा दीर्घकाल तक समृद्धि भोगता है ॥ 15 1/2 ॥
The king whose advice is not known to any person, internal or external, and who keeps an eye on all sides, enjoys prosperity for a long time. ॥ 15 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥