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mahabharat 5.38.1: विदुर जी कहते हैं - हे राजन! जब कोई वृद्ध व्यक्ति निकट आता है, तो युवा व्यक्ति की प्राणशक्ति बढ़ने लगती है; फिर जब वह वृद्ध व्यक्ति का स्वागत करने के लिए खड़ा होता है और उसे नमस्कार करता है, तब प्राणशक्ति अपनी मूल स्थिति में आ जाती है। 1.   |   mahabharat अध्याय 5.38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 38: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.38.1 
विदुर उवाच
ऊर्ध्वं प्राणा ह्युत्क्रामन्ति यून: स्थविर आयति।
प्रत्युत्थानाभिवादाभ्यां पुनस्तान् प्रतिपद्यते॥ १॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी कहते हैं - हे राजन! जब कोई वृद्ध व्यक्ति निकट आता है, तो युवा व्यक्ति की प्राणशक्ति बढ़ने लगती है; फिर जब वह वृद्ध व्यक्ति का स्वागत करने के लिए खड़ा होता है और उसे नमस्कार करता है, तब प्राणशक्ति अपनी मूल स्थिति में आ जाती है। 1.
 
Vidur ji says - O King! When an old person comes near, the life force of a young person starts rising; then when he stands up to welcome the old person and greets him, then the life force returns to its original state. 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)