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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 37: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका हितोपदेश
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श्लोक 59
श्लोक
5.37.59
सर्पश्चाग्निश्च सिंहश्च कुलपुत्रश्च भारत।
नावज्ञेया मनुष्येण सर्वे ह्येतेऽतितेजस:॥ ५९॥
अनुवाद
भारत! मनुष्यों को सर्प, अग्नि, सिंह और अपने कुल में उत्पन्न मनुष्यों का अनादर नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये सभी बड़े तेजस्वी हैं॥59॥
Bharat! Humans should not disrespect snakes, fire, lions and people born in their own clan because all of them are very brilliant. ॥ 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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