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श्लोक  5.37.46 
न स्याद् वनमृते व्याघ्रान् व्याघ्रा न स्युर्ऋते वनम्।
वनं हि रक्ष्यते व्याघ्रैर्व्याघ्रान् रक्षति काननम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
बाघों के बिना जंगलों की रक्षा नहीं की जा सकती और जंगलों के बिना बाघ जीवित नहीं रह सकते; क्योंकि बाघ जंगलों की रक्षा करते हैं और जंगल बाघों की रक्षा करते हैं।
 
Without tigers the forests cannot be protected and without forests tigers cannot survive; because tigers protect the forests and the forests protect the tigers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)