Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.37.39: पुत्रों को उत्पन्न करके, उन्हें ऋण के भार से मुक्त करके तथा उनकी जीविका का प्रबंध करके, उसे अपनी सभी पुत्रियों का विवाह योग्य वर से कर देना चाहिए और उसके बाद उसे वन में जाकर साधु की तरह रहने की इच्छा करनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 5.37: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका हितोपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्रों को उत्पन्न करके, उन्हें ऋण के भार से मुक्त करके तथा उनकी जीविका का प्रबंध करके, उसे अपनी सभी पुत्रियों का विवाह योग्य वर से कर देना चाहिए और उसके बाद उसे वन में जाकर साधु की तरह रहने की इच्छा करनी चाहिए।
Having produced sons, freeing them from the burden of debt and making arrangements for their livelihood, he should marry all his daughters to suitable grooms and after that he should desire to live in the forest like a hermit.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥