श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 37: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका हितोपदेश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.37.38 
सहायबन्धना ह्यर्था: सहायाश्चार्थबन्धना:।
अन्योन्यबन्धनावेतौ विनान्योन्यं न सिद्धॺत:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
धन की प्राप्ति सहायक पर निर्भर है और सहायक धन पर निर्भर है; दोनों एक दूसरे पर निर्भर हैं; परस्पर सहयोग के बिना इनकी प्राप्ति नहीं हो सकती ॥38॥
 
The attainment of wealth depends on a helper, and the helper depends on wealth; both are dependent on each other; they cannot be achieved without mutual cooperation. ॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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