Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.37.29: जब कोई राजा, जिसके सहायक दुष्ट हों, किसी परिषद में अनेक लोगों से सलाह ले रहा हो, तो उसे उनका विरोध नहीं करना चाहिए; उसे यह भी नहीं कहना चाहिए कि, 'मुझे आप पर विश्वास नहीं है'; बल्कि उसे कोई उचित बहाना बनाकर उस स्थान से चले जाना चाहिए। | mahabharat अध्याय 5.37: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका हितोपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न निह्नवं मन्त्रगतस्य गच्छेत्
संसृष्टमन्त्रस्य कुसङ्गतस्य।
न च ब्रूयान्नाश्वसिमि त्वयीति
सकारणं व्यपदेशं तु कुर्यात्॥ २९॥
अनुवाद
जब कोई राजा, जिसके सहायक दुष्ट हों, किसी परिषद में अनेक लोगों से सलाह ले रहा हो, तो उसे उनका विरोध नहीं करना चाहिए; उसे यह भी नहीं कहना चाहिए कि, 'मुझे आप पर विश्वास नहीं है'; बल्कि उसे कोई उचित बहाना बनाकर उस स्थान से चले जाना चाहिए।
When a king who has wicked assistants is taking advice from many people in a council, he should not contradict them; he should not even say, 'I do not trust you'; rather he should make some plausible excuse and leave the place.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥