| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 37: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका हितोपदेश » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 5.37.24  | कृत्यानि पूर्वं परिसंख्याय सर्वा-
ण्यायव्यये चानुरूपां च वृत्तिम्।
संगृह्णीयादनुरूपान् सहायान्
सहायसाध्यानि हि दुष्कराणि॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | पहले कर्तव्य, आय-व्यय और उचित वेतन आदि का निश्चय करके, फिर योग्य सहायकों को एकत्रित करना चाहिए, क्योंकि सहायकों की सहायता से कठिन से कठिन कार्य भी संपन्न हो जाते हैं ॥ 24॥ | | | | Having first decided on the duties, income-expenditure and appropriate salary etc., he should then gather capable assistants, because even the most difficult tasks can be accomplished with the help of assistants.॥ 24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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