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mahabharat 5.36.9: यदि कोई दूसरा व्यक्ति इस पुरुष को अग्नि और सूर्य के समान दग्ध करने वाले तीखे वचनों से चोट पहुँचाए, तो चोट खाने पर भी उस विद्वान पुरुष को महान दुःख सहते हुए भी यह सोचना चाहिए कि मैं अपने गुणों को दृढ़ कर रहा हूँ ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.36.9 
परश्चेदेनमभिविध्येत बाणै-
र्भृशं सुतीक्ष्णैरनलार्कदीप्तै:।
स विध्यमानोऽप्यतिदह्यमानो
विद्यात् कवि: सुकृतं मे दधाति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई दूसरा व्यक्ति इस पुरुष को अग्नि और सूर्य के समान दग्ध करने वाले तीखे वचनों से चोट पहुँचाए, तो चोट खाने पर भी उस विद्वान पुरुष को महान दुःख सहते हुए भी यह सोचना चाहिए कि मैं अपने गुणों को दृढ़ कर रहा हूँ ॥9॥
 
If someone else were to injure this man with sharp words that would burn like the fire and the sun, then even after being hurt, that learned man, despite suffering great pain, should think that he is strengthening his virtues. ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)