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mahabharat 5.36.74: हे कुरुराज! आपको पांडवों के साथ संधि कर लेनी चाहिए ताकि शत्रुओं को आपकी दुर्बलता जानने का अवसर न मिले। हे नरदेव! सभी पांडव सत्य पर अडिग हैं; अब आपको अपने पुत्र दुर्योधन को रोकना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  5.36.74 
संधत्स्व त्वं कौरव पाण्डुपुत्रै-
र्मा तेऽन्तरं रिपव: प्रार्थयन्तु।
सत्ये स्थितास्ते नरदेव सर्वे
दुर्योधनं स्थापय त्वं नरेन्द्र॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुराज! आपको पांडवों के साथ संधि कर लेनी चाहिए ताकि शत्रुओं को आपकी दुर्बलता जानने का अवसर न मिले। हे नरदेव! सभी पांडव सत्य पर अडिग हैं; अब आपको अपने पुत्र दुर्योधन को रोकना चाहिए।
 
O King of Kurus! You should make peace with the Pandavas so that the enemies do not get a chance to find your weakness. O Lord of men! All the Pandavas are firm on truth; now you should stop your son Duryodhan.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि प्रजागरपर्वणि विदुरहितवाक्ये षट्‍‍त्रिंशोऽध्याय:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत प्रजागरपर्वमें विदुर-हितवाक्यविषयक छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)