Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.36.71: सौम्य स्वभाव के साथ बल का विरोध नहीं होता; सूक्ष्म धर्म का शीघ्रता से अभ्यास करना चाहिए। क्रूरता से अर्जित लक्ष्मी नाशवान होती है, किन्तु यदि उसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, तो वह पुत्रों और पौत्रों के लिए स्थिर रहती है। 71.   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  5.36.71 
न तद् बलं यन्मृदुना विरुध्यते
सूक्ष्मो धर्मस्तरसा सेवितव्य:।
प्रध्वंसिनी क्रूरसमाहिता श्री-
र्मृदुप्रौढा गच्छति पुत्रपौत्रान्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
सौम्य स्वभाव के साथ बल का विरोध नहीं होता; सूक्ष्म धर्म का शीघ्रता से अभ्यास करना चाहिए। क्रूरता से अर्जित लक्ष्मी नाशवान होती है, किन्तु यदि उसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, तो वह पुत्रों और पौत्रों के लिए स्थिर रहती है। 71.
 
It is not strength which is in conflict with a gentle nature; subtle Dharma should be practised quickly. Lakshmi acquired through cruelty is perishable, but if it is increased gently, it remains stable for the sons and grandsons. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)