Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.36.68: महाराज! जो बिना रोग के उत्पन्न होता है, कड़वा है, सिर में दर्द उत्पन्न करने वाला है, पापों से युक्त है, कठोर, तीक्ष्ण और गर्म है, जो सज्जनों के सेवन के योग्य है और जिसे दुष्ट लोग नहीं खा सकते - उस क्रोध को पीकर आप शांत हो जाइए ॥68॥ | mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! जो बिना रोग के उत्पन्न होता है, कड़वा है, सिर में दर्द उत्पन्न करने वाला है, पापों से युक्त है, कठोर, तीक्ष्ण और गर्म है, जो सज्जनों के सेवन के योग्य है और जिसे दुष्ट लोग नहीं खा सकते - उस क्रोध को पीकर आप शांत हो जाइए ॥68॥
Maharaj! That which is produced without any disease, is bitter, causes headache, is associated with sins, is hard, sharp and hot, which is fit for consumption by gentlemen and which wicked people cannot consume - please drink that anger and become calm. ॥ 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥