Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.36.65: परन्तु एक दूसरे से मिलकर और एक दूसरे की सहायता करके एक ही जाति के लोग तालाब में कमल के समान बढ़ते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  5.36.65 
अन्योन्यसमुपष्टम्भादन्योन्यापाश्रयेण च।
ज्ञातय: सम्प्रवर्धन्ते सरसीवोत्पलान्युत॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु एक दूसरे से मिलकर और एक दूसरे की सहायता करके एक ही जाति के लोग तालाब में कमल के समान बढ़ते हैं।
 
But by meeting each other and helping each other, people of the same caste grow like lotus in a pond. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)