Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.36.60: हे भरतश्रेष्ठ धृतराष्ट्र! जलती हुई लकड़ियाँ अलग होने पर धुआँ छोड़ती हैं और एक होने पर जल उठती हैं। इसी प्रकार एक ही जाति के भाई भी अलग होने पर दुःख पाते हैं और एक होने पर सुखी रहते हैं। ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  5.36.60 
धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ धृतराष्ट्र! जलती हुई लकड़ियाँ अलग होने पर धुआँ छोड़ती हैं और एक होने पर जल उठती हैं। इसी प्रकार एक ही जाति के भाई भी अलग होने पर दुःख पाते हैं और एक होने पर सुखी रहते हैं। ॥60॥
 
O best of the Bharatas, Dhritarashtra! Burning logs emit smoke when they are separated and blaze up when they are together. Similarly, brothers of the same caste also suffer when they are divided and remain happy when they are united. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)