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mahabharat 5.36.54: उचित अध्ययन, न्यायपूर्ण युद्ध, पुण्य कर्म और अच्छी तरह से किया गया तप, सुख में वृद्धि करते हैं ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.36.54 
स्वधीतस्य सुयुद्धस्य सुकृतस्य च कर्मण:।
तपसश्च सुतप्तस्य तस्यान्ते सुखमेधते॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उचित अध्ययन, न्यायपूर्ण युद्ध, पुण्य कर्म और अच्छी तरह से किया गया तप, सुख में वृद्धि करते हैं ॥54॥
 
Proper study, just war, virtuous deeds and well-done penance result in increased happiness. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)