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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.36.43 
अर्चयेदेव मित्राणि सति वासति वा धने।
नानर्थयन् प्रजानाति मित्राणां सारफल्गुताम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
चाहे आपके पास पैसा हो या न हो, आपको अपने दोस्तों से बिना कुछ माँगे हमेशा सम्मान से पेश आना चाहिए। अपने दोस्तों के मूल्य और मूल्यहीनता का आकलन न करें।
 
Whether you have money or not, you should always treat your friends with respect without asking for anything from them. Do not judge the worth and worthlessness of your friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)