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mahabharat 5.36.42: जो लोग अपने मित्रों द्वारा सम्मानित होने तथा उनकी सहायता के लिए कृतज्ञ होने पर भी उनके नहीं बनते, ऐसे कृतघ्न लोग जब मर जाते हैं, तो मांसाहारी पशु भी उनका मांस नहीं खाते।   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.36.42 
सत्कृताश्च कृतार्थाश्च मित्राणां न भवन्ति ये।
तान् मृतानपि क्रव्यादा: कृतघ्नान् नोपभुञ्जते॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो लोग अपने मित्रों द्वारा सम्मानित होने तथा उनकी सहायता के लिए कृतज्ञ होने पर भी उनके नहीं बनते, ऐसे कृतघ्न लोग जब मर जाते हैं, तो मांसाहारी पशु भी उनका मांस नहीं खाते।
 
Those who, despite being honoured by their friends and being grateful for their help, do not become theirs; when such ungrateful people die, even carnivorous animals do not eat their flesh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)