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mahabharat 5.36.41: दुष्ट पुरुषों का स्वभाव बादलों के समान चंचल है; वे बिना किसी कारण के ही अचानक क्रोधित हो जाते हैं और अचानक प्रसन्न हो जाते हैं ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.36.41 
अकस्मादेव कुप्यन्ति प्रसीदन्त्यनिमित्तत:।
शीलमेतदसाधूनामभ्रं पारिप्लवं यथा॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट पुरुषों का स्वभाव बादलों के समान चंचल है; वे बिना किसी कारण के ही अचानक क्रोधित हो जाते हैं और अचानक प्रसन्न हो जाते हैं ॥ 41॥
 
The nature of wicked men is as fickle as clouds; they suddenly become angry and suddenly become happy without any reason. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)