Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.36.37: जिसका क्रोध भयभीत करता है और जिसकी सेवा संदेह से की जाती है, वह मित्र नहीं है। सच्चा मित्र वह है जिस पर पिता के समान विश्वास किया जा सके; अन्य तो केवल साथी हैं। | mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तन्मित्रं यस्य कोपाद् बिभेति
यद् वा मित्रं शङ्कितेनोपचर्यम्।
यस्मिन् मित्रे पितरीवाश्वसीत
तद् वै मित्रं सङ्गतानीतराणि॥ ३७॥
अनुवाद
जिसका क्रोध भयभीत करता है और जिसकी सेवा संदेह से की जाती है, वह मित्र नहीं है। सच्चा मित्र वह है जिस पर पिता के समान विश्वास किया जा सके; अन्य तो केवल साथी हैं।
He whose anger makes one fearful and whose service is done with suspicion is not a friend. A true friend is he who can be trusted like a father; others are mere companions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥