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श्लोक  5.36.34 
तृणानि भूमिरुदकं वाक् चतुर्थी च सूनृता।
सतामेतानि गेहेषु नोच्छिद्यन्ते कदाचन॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
घास, मिट्टी, जल और चौथी मीठी वाणी से बना आसन - सज्जन के घर में इन चार चीजों की कभी कमी नहीं होती।
 
A seat made of grass, earth, water and fourthly sweet speech - there is never a dearth of these four things in the house of a gentleman. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)