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mahabharat 5.36.31: जो परिवार सदाचार से रहित हैं, वे गाय, गाय, घोड़े और हरी-भरी फसलें होने पर भी उन्नति नहीं कर सकते ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.36.31 
गोभि: पशुभिरश्वैश्च कृष्या च सुसमृद्धया।
कुलानि न प्ररोहन्ति यानि हीनानि वृत्तत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जो परिवार सदाचार से रहित हैं, वे गाय, गाय, घोड़े और हरी-भरी फसलें होने पर भी उन्नति नहीं कर सकते ॥31॥
 
Those families which are devoid of good conduct cannot prosper even if they are blessed with cows, cattle, horses and lush green crops. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)