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mahabharat 5.36.3: साध्य बोले - महर्षि! हम सब साध्यदेवता हैं, आपको देखकर हम आपके विषय में कोई अनुमान नहीं लगा सकते। हम आपको शास्त्रों के ज्ञाता, धैर्यवान और बुद्धिमान पाते हैं; अतः आप हमें अपने ज्ञान से परिपूर्ण उदार वचन सुनाने की कृपा करें।   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.36.3 
साध्या ऊचु:
साध्या देवा वयमेते महर्षे
दृष्ट्वा भवन्तं न शक्नुमोऽनुमातुम्।
श्रुतेन धीरो बुद्धिमांस्त्वं मतो न:
काव्यां वाचं वक्तुमर्हस्युदाराम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
साध्य बोले - महर्षि! हम सब साध्यदेवता हैं, आपको देखकर हम आपके विषय में कोई अनुमान नहीं लगा सकते। हम आपको शास्त्रों के ज्ञाता, धैर्यवान और बुद्धिमान पाते हैं; अतः आप हमें अपने ज्ञान से परिपूर्ण उदार वचन सुनाने की कृपा करें।
 
Sadhya said - Maharshi! We are all Sadhyadevatas, we cannot make any assumptions about you just by looking at you. We find you to be endowed with knowledge of scriptures, patient and intelligent; hence, please tell us your generous words full of wisdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)