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mahabharat 5.36.26: देवताओं का धन नष्ट करने, ब्राह्मणों का धन चुराने तथा ब्राह्मणों की मर्यादा का उल्लंघन करने से श्रेष्ठ कुल भी नीच हो जाता है। 26.   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.36.26 
देवद्रव्यविनाशेन ब्रह्मस्वहरणेन च।
कुलान्यकुलतां यान्ति ब्राह्मणातिक्रमेण च॥ २६॥
 
 
अनुवाद
देवताओं का धन नष्ट करने, ब्राह्मणों का धन चुराने तथा ब्राह्मणों की मर्यादा का उल्लंघन करने से श्रेष्ठ कुल भी नीच हो जाता है। 26.
 
By destroying the wealth of the gods, stealing the wealth of Brahmins and violating the decorum of Brahmins, even the best of families become vile. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)