Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.36.24: जिनका आचरण ढीला नहीं है, जो अपने दोषों से माता-पिता को कष्ट नहीं देते, जो प्रसन्न मन से धर्म के मार्ग पर चलते हैं और जो मिथ्यात्व का त्याग करके अपने कुल के लिए विशेष यश चाहते हैं, वे कुल के श्रेष्ठ लोग हैं। | mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
येषां हि वृत्तं व्यथते न योनि-
श्चित्तप्रसादेन चरन्ति धर्मम्।
ते कीर्तिमिच्छन्ति कुले विशिष्टां
त्यक्तानृतास्तानि महाकुलानि॥ २४॥
अनुवाद
जिनका आचरण ढीला नहीं है, जो अपने दोषों से माता-पिता को कष्ट नहीं देते, जो प्रसन्न मन से धर्म के मार्ग पर चलते हैं और जो मिथ्यात्व का त्याग करके अपने कुल के लिए विशेष यश चाहते हैं, वे कुल के श्रेष्ठ लोग हैं।
Those whose good conduct is not lax, who do not trouble their parents with their faults, who follow the path of religion with a happy mind and who abandon falsehood and seek special fame for their family, they are the great people of the family. 24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥