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mahabharat 5.36.23: विदुरजी बोले- राजन! जिनमें तप, इन्द्रिय संयम, वेदों का स्वाध्याय, यज्ञ, पवित्र विवाह, सदा अन्नदान और सदाचार- ये सात गुण विद्यमान हैं, वे महान (श्रेष्ठ) सज्जन कहलाते हैं॥23॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.36.23 
विदुर उवाच
तपो दमो ब्रह्मवित्तं विताना:
पुण्या विवाहा: सततान्नदानम्।
येष्वेवैते सप्त गुणा वसन्ति
सम्यग्वृत्तास्तानि महाकुलानि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
विदुरजी बोले- राजन! जिनमें तप, इन्द्रिय संयम, वेदों का स्वाध्याय, यज्ञ, पवित्र विवाह, सदा अन्नदान और सदाचार- ये सात गुण विद्यमान हैं, वे महान (श्रेष्ठ) सज्जन कहलाते हैं॥23॥
 
Vidurji said- Rajan! Those in whom penance, control of senses, self-study of Vedas, yagya, sacred marriage, always donating food and good conduct - these seven qualities are present, are called great (best) noble ones. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)