श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.36.16 
भावमिच्छति सर्वस्य नाभावे कुरुते मन:।
सत्यवादी मृदुर्दान्तो य: स उत्तमपूरुष:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो सबका भला चाहता है, कभी किसी का बुरा नहीं सोचता, सत्यवादी है, सज्जन है और अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, वही अच्छा मनुष्य माना जाता है ॥16॥
 
He who wishes well for everyone, never thinks of anyone's ill-being, is truthful, gentle and has controlled his senses is considered a good man. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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