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mahabharat 5.36.14: मनुष्य जिन-जिन विषयों से मन हटाता रहता है, उनसे वह मुक्त हो जाता है; इस प्रकार यदि वह अन्य सब विषयों से मुक्त हो जाए, तो उसे कभी किंचितमात्र भी दुःख नहीं होगा ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.36.14 
यतो यतो निवर्तते ततस्ततो विमुच्यते।
निवर्तनाद्धि सर्वतो न वेत्ति दु:खमण्वपि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य जिन-जिन विषयों से मन हटाता रहता है, उनसे वह मुक्त हो जाता है; इस प्रकार यदि वह अन्य सब विषयों से मुक्त हो जाए, तो उसे कभी किंचितमात्र भी दुःख नहीं होगा ॥14॥
 
From whatever subjects a person keeps diverting his mind, he gets liberated from them; In this way, if one becomes free from everything else, one will never experience even the slightest sorrow. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)