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mahabharat 5.36.11: जो स्वयं किसी के विषय में कुछ बुरा नहीं कहता, न दूसरों से कहलवाता है, जो बिना मार खाए न तो किसी को मारता है, न दूसरों से मरवाता है, जो मार खाकर भी अपराधी को मारना नहीं चाहता, उसके आगमन की (स्वर्ग में) देवता भी प्रतीक्षा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.36.11 
अतिवादं न प्रवदेन्न वादयेद्
योऽनाहत: प्रतिहन्यान्न घातयेत्।
हन्तुं च यो नेच्छति पापकं वै
तस्मै देवा: स्पृहयन्त्यागताय॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो स्वयं किसी के विषय में कुछ बुरा नहीं कहता, न दूसरों से कहलवाता है, जो बिना मार खाए न तो किसी को मारता है, न दूसरों से मरवाता है, जो मार खाकर भी अपराधी को मारना नहीं चाहता, उसके आगमन की (स्वर्ग में) देवता भी प्रतीक्षा करते हैं।
 
He who himself does not say anything bad about anybody, nor does he get it said by others, who neither kills anybody without getting beaten nor gets anybody killed by others, who does not want to kill the culprit even after getting beaten, even the gods (in heaven) await his arrival.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)