Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.36.10: जैसे कपड़ा जिस रंग में रंगा जाता है, उसी रंग का हो जाता है, वैसे ही यदि कोई सज्जन, दुष्ट, तपस्वी या चोर की सेवा करता है, तो वह उनके वश में हो जाता है और उनके रंग से प्रभावित हो जाता है॥10॥ | mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि सन्तं सेवति यद्यसन्तं
तपस्विनं यदि वा स्तेनमेव।
वासो यथा रङ्गवशं प्रयाति
तथा स तेषां वशमभ्युपैति॥ १०॥
अनुवाद
जैसे कपड़ा जिस रंग में रंगा जाता है, उसी रंग का हो जाता है, वैसे ही यदि कोई सज्जन, दुष्ट, तपस्वी या चोर की सेवा करता है, तो वह उनके वश में हो जाता है और उनके रंग से प्रभावित हो जाता है॥10॥
Just like a cloth takes on the colour in which it is dyed, similarly if someone serves a gentleman, a bad man, an ascetic or a thief, he comes under their control and gets affected by their colour.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥