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mahabharat 5.35.8: केशिनी बोली - विरोचन! ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं या राक्षस? यदि ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं, तो सुधन्वा ब्राह्मण मेरी शय्या पर क्यों न बैठें? अर्थात् मैं सुधन्वा से विवाह क्यों न करूँ? 8॥   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.35.8 
केशिन्युवाच
किं ब्राह्मणा: स्विच्छ्रेयांसो दितिजा: स्विद् विरोचन।
अथ केन स्म पर्यङ्कं सुधन्वा नाधिरोहति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
केशिनी बोली - विरोचन! ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं या राक्षस? यदि ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं, तो सुधन्वा ब्राह्मण मेरी शय्या पर क्यों न बैठें? अर्थात् मैं सुधन्वा से विवाह क्यों न करूँ? 8॥
 
Keshini said – Virochana! Are Brahmins superior or demons? If Brahmins are superior then why should not the Sudhanva Brahmins sit on my bed? That is, why should I not marry Sudhanva? 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)