श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  5.35.74 
सुवर्णपुष्पां पृथिवीं चिन्वन्ति पुरुषास्त्रय:।
शूरश्च कृतविद्यश्च यश्च जानाति सेवितुम्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
वीर, विद्वान् और सेवा धर्म को जानने वाले - ये तीन प्रकार के लोग पृथ्वीरूपी लता से सुवर्णमय पुष्पों को एकत्रित करते हैं ॥74॥
 
The brave, the learned and the one who knows the religion of service – these three types of people collect the golden flowers from the creeper in the form of earth. 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)