श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  5.35.72 
ऋषीणां च नदीनां च कुलानां च महात्मनाम्।
प्रभवो नाधिगन्तव्य: स्त्रीणां दुश्चरितस्य च॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों, नदियों, कुलों, महात्माओं तथा स्त्रियों के दुश्चरित्रों की उत्पत्ति का ज्ञान नहीं किया जा सकता। 72.
 
The origin of sages, rivers, clans, great souls and the bad character of women cannot be known. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)