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mahabharat 5.35.43: मद्यपान, कलह, समूह से वैर, पति-पत्नी में मतभेद, कुटुम्बियों में मतभेद, राजा से द्वेष, स्त्री-पुरुष में कलह और कुमार्ग - ये सब त्यागने योग्य कहे गए हैं ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.35.43 
मद्यपानं कलहं पूगवैरं
भार्यापत्योरन्तरं ज्ञातिभेदम्।
राजद्विष्टं स्त्रीपुंसयोर्विवादं
वर्ज्यान्याहुर्यश्च पन्था: प्रदुष्ट:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मद्यपान, कलह, समूह से वैर, पति-पत्नी में मतभेद, कुटुम्बियों में मतभेद, राजा से द्वेष, स्त्री-पुरुष में कलह और कुमार्ग - ये सब त्यागने योग्य कहे गए हैं ॥ 43॥
 
Drinking alcohol, quarreling, enmity with the group, creating differences between husband and wife, creating differences among family members, hatred towards the king, disputes between men and women and bad ways - all these have been declared to be worthy of being abandoned. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)