श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.35.40 
न देवा दण्डमादाय रक्षन्ति पशुपालवत्।
यं तु रक्षितुमिच्छन्ति बुद्धॺा संविभजन्ति तम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
देवता लोग चरवाहों की तरह लाठी लेकर किसी की रक्षा नहीं करते। वे जिसकी रक्षा करना चाहते हैं, उसे सद्बुद्धि प्रदान करते हैं ॥40॥
 
The gods do not guard anyone with a stick like shepherds. They give the one they want to protect good wisdom. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)