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mahabharat 5.35.4: हे श्रेष्ठ पुरुषो! जब तक इस लोक में मनुष्य का पवित्र गुणगान होता रहता है, तब तक वह स्वर्ग में भी सम्मानित रहता है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.35.4 
यावत् कीर्तिर्मनुष्यस्य पुण्या लोके प्रगीयते।
तावत् स पुरुषव्याघ्र स्वर्गलोके महीयते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ पुरुषो! जब तक इस लोक में मनुष्य का पवित्र गुणगान होता रहता है, तब तक वह स्वर्ग में भी सम्मानित रहता है। 4॥
 
Best man! As long as a man's sacred praises are sung in this world, he remains honored in heaven. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)