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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश
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श्लोक 22
श्लोक
5.35.22
विदुर उवाच
एवं कृतपणौ क्रुद्धौ तत्राभिजग्मतुस्तदा।
विरोचनसुधन्वानौ प्रह्रादो यत्र तिष्ठति॥ २२॥
अनुवाद
विदुर जी कहते हैं - हे राजन! यह शर्त लगाकर विरोचन और सुधन्वा दोनों एक दूसरे पर क्रोधित होकर उस स्थान पर गए जहाँ प्रह्लाद था।
Vidur ji says - O King! Having made this bet, Virochana and Sudhanva, being angry with each other, both went to the place where Prahlada was.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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