विदुर उवाच
सर्वतीर्थेषु वा स्नानं सर्वभूतेषु चार्जवम्।
उभे त्वेते समे स्यातामार्जवं वा विशिष्यते॥ २॥
अनुवाद
विदुरजी ने कहा- राजन! समस्त तीर्थों में स्नान करना तथा समस्त प्राणियों के साथ सौम्य व्यवहार करना- दोनों एक ही हैं; अर्थात् सौम्य व्यवहार का विशेष महत्व है॥2॥
Vidurji said- Rajan! Bathing in all places of pilgrimage and treating all living beings with gentleness – both are the same; Or gentle behavior has special importance. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥