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mahabharat 5.35.18: विरोचन बोले - "सुधन्वान्! हम राक्षसों के पास जो भी धन, सोना, गौएँ, घोड़े आदि हैं, उन्हें मैं जुए के रूप में अर्पित कर रहा हूँ। आओ, हम दोनों जाकर इस विषय के जानकारों से पूछें कि हम दोनों में श्रेष्ठ कौन है।"॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.35.18 
विरोचन उवाच
हिरण्यं च गवाश्वं च यद् वित्तमसुरेषु न:।
सुधन्वन् विपणे तेन प्रश्नं पृच्छाव ये विदु:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
विरोचन बोले - "सुधन्वान्! हम राक्षसों के पास जो भी धन, सोना, गौएँ, घोड़े आदि हैं, उन्हें मैं जुए के रूप में अर्पित कर रहा हूँ। आओ, हम दोनों जाकर इस विषय के जानकारों से पूछें कि हम दोनों में श्रेष्ठ कौन है।"॥18॥
 
Virochana said, "Sudhanvan! I am offering all the wealth, gold, cows, horses etc. that we demons have as a gamble. Let us both go and ask those who are knowledgeable about this subject as to who is superior among us two."॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)