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mahabharat 5.34.9: धैर्यवान पुरुष को उचित है कि वह पहले कर्मों का उद्देश्य, उनके परिणाम और अपनी प्रगति पर विचार करे और फिर निश्चय करे कि कार्य आरम्भ करना चाहिए या नहीं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.34.9 
अनुबन्धं च सम्प्रेक्ष्य विपाकं चैव कर्मणाम्।
उत्थानमात्मनश्चैव धीर: कुर्वीत वा न वा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
धैर्यवान पुरुष को उचित है कि वह पहले कर्मों का उद्देश्य, उनके परिणाम और अपनी प्रगति पर विचार करे और फिर निश्चय करे कि कार्य आरम्भ करना चाहिए या नहीं॥9॥
 
It is appropriate for a patient man to first consider the purpose of actions, their consequences and his own progress and then decide whether to start the work or not.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)