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mahabharat 5.34.8: किसी भी उद्देश्य से किए गए कार्य में पहले उद्देश्य को समझना चाहिए। कोई भी कार्य करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए; जल्दबाजी में कोई भी कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिए।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.34.8 
अनुबन्धानपेक्षेत सानुबन्धेषु कर्मसु।
सम्प्रधार्य च कुर्वीत न वेगेन समाचरेत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
किसी भी उद्देश्य से किए गए कार्य में पहले उद्देश्य को समझना चाहिए। कोई भी कार्य करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए; जल्दबाजी में कोई भी कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिए।॥8॥
 
In any work done with a purpose, one must first understand the purpose. One must think well before doing anything; one must not start any work in a hurry.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)