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श्लोक 5.34.8  |
अनुबन्धानपेक्षेत सानुबन्धेषु कर्मसु।
सम्प्रधार्य च कुर्वीत न वेगेन समाचरेत्॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| किसी भी उद्देश्य से किए गए कार्य में पहले उद्देश्य को समझना चाहिए। कोई भी कार्य करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए; जल्दबाजी में कोई भी कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिए।॥8॥ |
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| In any work done with a purpose, one must first understand the purpose. One must think well before doing anything; one must not start any work in a hurry.॥ 8॥ |
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