Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.34.76: राजा! वाणी पर पूर्ण संयम रखना अत्यन्त कठिन माना गया है; तथापि विशेष अर्थ वाली तथा अद्भुत बातों से युक्त वाणी भी अधिक नहीं बोली जा सकती (अतः अत्यन्त कठिन होने पर भी वाणी पर संयम रखना उचित है)। | mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वाक्संयमो हि नृपते सुदुष्करतमो मत:।
अर्थवच्च विचित्रं च न शक्यं बहु भाषितुम्॥ ७६॥
अनुवाद
राजा! वाणी पर पूर्ण संयम रखना अत्यन्त कठिन माना गया है; तथापि विशेष अर्थ वाली तथा अद्भुत बातों से युक्त वाणी भी अधिक नहीं बोली जा सकती (अतः अत्यन्त कठिन होने पर भी वाणी पर संयम रखना उचित है)।
King! Complete control over speech is considered very difficult; however, even speech having special meaning and full of wonders cannot be spoken much (therefore, despite it being extremely difficult, it is advisable to control speech).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥