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mahabharat 5.34.7: इसी प्रकार यदि उत्तम उपायों से सावधानी से किया गया कोई कार्य सफल न हो, तो बुद्धिमान पुरुष को उसके लिए मन में पश्चाताप नहीं करना चाहिए ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.34.7 
तथैव योगविहितं यत् तु कर्म न सिध्यति।
उपाययुक्तं मेधावी न तत्र ग्लपयेन्मन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार यदि उत्तम उपायों से सावधानी से किया गया कोई कार्य सफल न हो, तो बुद्धिमान पुरुष को उसके लिए मन में पश्चाताप नहीं करना चाहिए ॥7॥
 
Similarly, if some work done with caution using good methods is not successful, a wise man should not feel remorseful about it in his mind. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)