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mahabharat 5.34.66: राजा ! जिस प्रकार छोटे-छोटे छेद वाले जाल में फँसी दो बड़ी मछलियाँ मिलकर जाल को काट देती हैं, उसी प्रकार काम और क्रोध दोनों विवेक को नष्ट कर देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.66 
क्षुद्राक्षेणेव जालेन झषावपिहितावुरू।
कामश्च राजन् क्रोधश्च तौ प्रज्ञानं विलुम्पत:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
राजा ! जिस प्रकार छोटे-छोटे छेद वाले जाल में फँसी दो बड़ी मछलियाँ मिलकर जाल को काट देती हैं, उसी प्रकार काम और क्रोध दोनों विवेक को नष्ट कर देते हैं।
 
King! Just as two large fishes caught in a net with tiny holes together cut the net, in the same way, lust and anger both destroy discrimination.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)