Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.34.65: जिसने अपने आप पर विजय प्राप्त कर ली है, उसकी आत्मा ही उसकी मित्र है। जब आत्मा पर विजय प्राप्त हो जाती है, तो वह उसकी सच्ची मित्र होती है और जब उस पर विजय प्राप्त नहीं होती, तो वह उसकी शत्रु होती है। 65. | mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बन्धुरात्माऽऽत्मनस्तस्य येनैवात्माऽऽत्मना जित:।
स एव नियतो बन्धु: स एवानियतो रिपु:॥ ६५॥
अनुवाद
जिसने अपने आप पर विजय प्राप्त कर ली है, उसकी आत्मा ही उसकी मित्र है। जब आत्मा पर विजय प्राप्त हो जाती है, तो वह उसकी सच्ची मित्र होती है और जब उस पर विजय प्राप्त नहीं होती, तो वह उसकी शत्रु होती है। 65.
The soul of one who has conquered his own self is his friend. When the soul is conquered, it is his true friend and when it is not conquered, it is his enemy. 65.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥