Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.34.62: जो मनुष्य धर्म और धन को त्यागकर इन्द्रियों के वश में हो जाता है, वह शीघ्र ही धन, प्राण, ऐश्वर्य और स्त्री को भी खो देता है ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.34.62 
धर्मार्थौ य: परित्यज्य स्यादिन्द्रियवशानुग:।
श्रीप्राणधनदारेभ्य: क्षिप्रं स परिहीयते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धर्म और धन को त्यागकर इन्द्रियों के वश में हो जाता है, वह शीघ्र ही धन, प्राण, ऐश्वर्य और स्त्री को भी खो देता है ॥62॥
 
One who abandons religion and wealth and gets under the influence of senses, he soon loses his wealth, life, wealth and even his wife. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)