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mahabharat 5.34.6: हे भारत! जो छल-कपट के काम अन्यायपूर्ण साधनों (अन्यायपूर्ण युद्ध और जुआ) आदि से सम्पन्न होते हैं, उनमें अपने मन को मत लगाओ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.6 
मिथ्योपेतानि कर्माणि सिध्येयुर्यानि भारत।
अनुपायप्रयुक्तानि मा स्म तेषु मन: कृथा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! जो छल-कपट के काम अन्यायपूर्ण साधनों (अन्यायपूर्ण युद्ध और जुआ) आदि से सम्पन्न होते हैं, उनमें अपने मन को मत लगाओ॥6॥
 
O Bharata! Do not engage your mind in those deceitful acts which are accomplished by using unjust means (unjust war and gambling) etc.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)